PosiStep 9: कॉरपोरेट एक्शन: डिविडेंड, बोनस, स्प्लिट, बायबैक
कंपनियाँ कभी-कभी ऐसे फ़ैसले लेती हैं जो आपके शेयर बदल देते हैं: डिविडेंड देती हैं, बोनस शेयर देती हैं, शेयर स्प्लिट करती हैं, उन्हें वापस ख़रीदती हैं या नए शेयर पेश करती हैं। इन्हें कॉरपोरेट एक्शन कहते हैं। यह PosiStep हर एक को आसान आँकड़ों से समझाता है।
डिविडेंड, एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेट
डिविडेंड प्रति शेयर दी जाने वाली नक़द रकम है, अंतरिम (साल के बीच) या फ़ाइनल (साल के नतीजों के बाद)। इसे पाने के लिए आपके पास एक्स-डेट से पहले शेयर होना चाहिए। रिकॉर्ड डेट वह दिन है जब कंपनी शेयरधारकों की सूची देखती है। भारत में T+1 सेटलमेंट की वजह से एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेट आमतौर पर एक ही दिन होते हैं।
एक्स-डेट पर शेयर का भाव आमतौर पर लगभग डिविडेंड जितना गिर जाता है, क्योंकि नए ख़रीदारों को वह डिविडेंड नहीं मिलता। इसलिए डिविडेंड मुफ़्त पैसा नहीं है: वैल्यू शेयर के भाव से आपके बैंक खाते में जाती है।
बोनस शेयर
बोनस इश्यू में कंपनी मौजूदा शेयरधारकों को मुफ़्त में अतिरिक्त शेयर देती है। 1:1 बोनस में हर 1 शेयर पर 1 नया शेयर मिलता है, तो 100 शेयर 200 हो जाते हैं।
कंपनी की क़ीमत नहीं बढ़ती, इसलिए भाव एडजस्ट होता है: 1:1 बोनस में लगभग आधा। आपकी कुल वैल्यू लगभग वही रहती है; बस आपके पास ज़्यादा शेयर होते हैं, हर एक कम भाव पर।
स्टॉक स्प्लिट
स्टॉक स्प्लिट में हर शेयर छोटे शेयरों में बँट जाता है और फ़ेस वैल्यू घट जाती है। अगर ₹10 फ़ेस वैल्यू का शेयर ₹2 के पाँच शेयरों में बँटे, तो 100 शेयर 500 हो जाते हैं और भाव लगभग पाँचवाँ हिस्सा रह जाता है।
बोनस की तरह, स्प्लिट से कंपनी की क़ीमत या आपकी कुल होल्डिंग की वैल्यू नहीं बदलती। इससे हर शेयर सस्ता हो जाता है, जिससे ज़्यादा लोग उसे ख़रीद सकते हैं।
बायबैक
बायबैक में कंपनी अपने नक़द से शेयरधारकों से अपने ही शेयर ख़रीदती है, अक्सर बाज़ार भाव से ऊपर। ये शेयर रद्द हो जाते हैं, तो कम शेयर बचते हैं और हर बचा शेयर कंपनी का थोड़ा बड़ा हिस्सा रखता है।
शेयरधारक अपने शेयर देने (टेंडर ऑफ़र) या रखने का फ़ैसला कर सकते हैं। बायबैक यह संकेत दे सकता है कि मैनेजमेंट शेयरों को अच्छी वैल्यू मानता है, पर इसमें नक़द भी ख़र्च होता है।
राइट्स इश्यू
राइट्स इश्यू में कंपनी मौजूदा शेयरधारकों को उनकी होल्डिंग के अनुपात में नए शेयर पेश करके पैसा जुटाती है, आमतौर पर छूट पर। आप उन्हें ख़रीद सकते हैं, अपना अधिकार किसी और को बेच सकते हैं, या छोड़ सकते हैं।
अगर आप कुछ न करें, तो कंपनी में आपका हिस्सा छोटा हो जाता है, क्योंकि नए शेयर बनते हैं और दूसरे उन्हें ख़रीदते हैं।
PositoAI की भूमिका
हर कंपनी पेज का Actions टैब उसके डिविडेंड (सालाना टोटल के साथ), बोनस, स्प्लिट, बायबैक और राइट्स इश्यू, एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेट के साथ, और आने वाले एक्शन दिखाता है। मुख्य Actions सेक्शन पूरे बाज़ार के हाल के और आने वाले कॉरपोरेट एक्शन दिखाता है।
मुख्य शब्द
- कॉरपोरेट एक्शन (Corporate action)
- कंपनी का फ़ैसला जो उसके शेयरों पर असर डाले: डिविडेंड, बोनस, स्प्लिट, बायबैक, राइट्स इश्यू।
- एक्स-डेट (Ex-date)
- डिविडेंड या बोनस पाने के लिए इस तारीख़ से पहले शेयर होना ज़रूरी है।
- रिकॉर्ड डेट (Record date)
- जिस दिन कंपनी देखती है कि उसके शेयरधारक कौन हैं।
- बोनस इश्यू (Bonus issue)
- मौजूदा धारकों को मुफ़्त अतिरिक्त शेयर; भाव एडजस्ट होता है, कुल वैल्यू लगभग वही।
- स्टॉक स्प्लिट (Stock split)
- हर शेयर कम फ़ेस वैल्यू वाले छोटे शेयरों में बँटना।
- बायबैक (Buyback)
- कंपनी अपने शेयर वापस ख़रीदकर रद्द करती है।
ख़ुद करके देखें
आपके पास काल्पनिक कंपनी Maple Foods के 100 शेयर ₹600 प्रति शेयर (₹60,000) पर हैं। कंपनी 1:1 बोनस घोषित करती है। एक्स-डेट के ठीक बाद सबसे संभावित स्थिति क्या है?
1:1 बोनस में हर शेयर पर 1 अतिरिक्त शेयर: 200 शेयर। कंपनी की क़ीमत वही है, इसलिए भाव लगभग आधा, यानी लगभग ₹300। कुल वैल्यू लगभग ₹60,000 ही रहती है।
PositoAI पर लाइव देखें
PositoAI पर Infosys खोलें, Actions टैब पर क्लिक करें और उसका सबसे हाल का बोनस और सबसे नए पूरे साल के डिविडेंड ढूँढें। फिर मुख्य Actions सेक्शन खोलें और बाज़ार में कोई आने वाला डिविडेंड देखें।
यह क्या नहीं बताता
बोनस और स्प्लिट अपने-आप आपको अमीर नहीं बनाते; ये शेयरों की संख्या बदलते हैं, कंपनी की क़ीमत नहीं। डिविडेंड वैल्यू को शेयर के भाव से नक़द में ले जाता है। बायबैक या राइट्स इश्यू कंपनी के फ़ैसलों के बारे में बताते हैं, यह नहीं कि उसका शेयर अच्छा सौदा है।
छोटा क्विज़
डिविडेंड पाने के लिए आपके पास शेयर होना चाहिए:
एक्स-डेट से पहले शेयर होना ज़रूरी है। एक्स-डेट या उसके बाद ख़रीदने वालों को वह डिविडेंड नहीं मिलता।
1:1 बोनस के बाद शेयर के भाव का आमतौर पर क्या होता है?
शेयरों की संख्या दोगुनी होती है पर कंपनी की क़ीमत नहीं, इसलिए भाव लगभग आधा हो जाता है।
₹10 फ़ेस वैल्यू का शेयर ₹2 के शेयरों में स्प्लिट होता है। आपके पास 100 शेयर थे। अब कितने?
₹10 ÷ ₹2 = 5, इसलिए हर शेयर 5 बनता है: 100 × 5 = 500 शेयर, हर एक लगभग पाँचवें भाव पर।
बायबैक में कंपनी:
बायबैक में कंपनी के नक़द से अपने ही शेयर ख़रीदे जाते हैं, जिन्हें फिर रद्द कर दिया जाता है।
डिविडेंड की एक्स-डेट पर शेयर के भाव का आमतौर पर क्या होता है?
नए ख़रीदारों को डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए भाव आमतौर पर लगभग डिविडेंड जितना गिरता है।
यह PosiStep पूरा करने के लिए इस पेज के सभी सवालों के सही जवाब दें।
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PosiCourse सिर्फ़ शिक्षा के लिए है। यह किसी शेयर को ख़रीदने या बेचने की सलाह नहीं देता। काल्पनिक आँकड़ों वाले उदाहरण असली कंपनियाँ नहीं हैं। PositoAI is for research and education only and is not investment advice.