PosiStep 5: ट्रेड कैसे होता है: ऑर्डर, बिड-आस्क, लिक्विडिटी, सेटलमेंट
आपके पास डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट है (PosiStep 2)। "ख़रीदें" दबाने पर असल में क्या होता है? यह PosiStep आपके फ़ोन से डीमैट अकाउंट तक एक ऑर्डर का सफ़र दिखाता है, और रास्ते में आने वाले शब्द समझाता है।
बिड, आस्क और स्प्रेड
किसी भी पल कुछ लोग शेयर ख़रीदना चाहते हैं और कुछ बेचना। अभी ख़रीदार जो सबसे ऊँचा भाव दे रहा है वह बिड है; बेचने वाला जो सबसे कम भाव लेगा वह आस्क (ऑफ़र) है। दोनों के बीच का छोटा अंतर स्प्रेड है।
सौदा तब होता है जब ख़रीदार और बेचने वाला किसी भाव पर सहमत होते हैं। आपके ब्रोकर का ऐप क़तार में खड़े सबसे अच्छे बिड और आस्क दिखाता है।
मार्केट ऑर्डर और लिमिट ऑर्डर
मार्केट ऑर्डर उपलब्ध सबसे अच्छे भाव पर तुरंत ख़रीदता या बेचता है। यह तेज़ है, पर सही भाव आपके हाथ में नहीं होता, जो भाव तेज़ी से बदल रहे हों तब मायने रखता है।
लिमिट ऑर्डर में भाव आप तय करते हैं: सिर्फ़ ₹100 या कम पर ख़रीदें, या सिर्फ़ ₹120 या ज़्यादा पर बेचें। बाज़ार आपके भाव तक न पहुँचे तो ऑर्डर पूरा नहीं होगा, पर आप कभी अपनी चुनी रकम से ज़्यादा नहीं देंगे। स्टॉप-लॉस ऑर्डर बेचने का निर्देश है जो भाव आपकी तय सीमा तक गिरने पर चालू होता है, नुकसान सीमित रखने के लिए।
लिक्विडिटी: शेयर कितनी आसानी से बिकता-ख़रीदा जाता है
शेयर तब लिक्विड होता है जब बहुत लोग उसे रोज़ ट्रेड करते हैं, ताकि आप पिछले भाव के क़रीब, कम स्प्रेड पर जल्दी ख़रीद-बेच सकें। Infosys और Apple जैसी बड़ी कंपनियाँ बहुत लिक्विड हैं।
बहुत छोटे या बहुत कम भाव वाले कई शेयर दिन में कुछ ही बार ट्रेड होते हैं। उनका स्प्रेड चौड़ा हो सकता है, बड़ा ऑर्डर भाव खिसका सकता है, और जब चाहें तब बेचना मुश्किल हो सकता है। भारत में कई शेयरों पर रोज़ की प्राइस बैंड (सर्किट लिमिट) भी होती है जो तय प्रतिशत से ज़्यादा भाव बदलने पर ट्रेडिंग रोक देती है।
सेटलमेंट: शेयर असल में आपके कब होते हैं
सौदे के बाद एक्सचेंज का क्लियरिंग सिस्टम पक्का करता है कि पैसा और शेयर हाथ बदलें। भारत 2023 में T+1 सेटलमेंट (सौदे का दिन + एक कामकाजी दिन) पर आया, और अमेरिका 2024 में। यानी सोमवार को ख़रीदे शेयर मंगलवार को आपके डीमैट या ब्रोकरेज अकाउंट में आते हैं।
सौदे पर लगने वाले चार्ज
हर सौदे की लागत होती है। भारत में आमतौर पर इनमें ब्रोकर की ब्रोकरेज, सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT), एक्सचेंज ट्रांज़ैक्शन चार्ज, छोटी SEBI फ़ीस, चार्ज पर GST और स्टांप ड्यूटी शामिल हैं। अमेरिका में कई ब्रोकर कमीशन नहीं लेते, पर छोटी रेगुलेटरी फ़ीस लग सकती है। चार्ज ब्रोकर के हिसाब से अलग होते हैं, इसलिए हर सौदे के बाद ब्रोकर का भेजा कॉन्ट्रैक्ट नोट देखें।
बार-बार ट्रेडिंग का मतलब है ये लागतें बार-बार देना, और यही एक वजह है कि PosiStep 7 निवेश और ट्रेडिंग की तुलना करता है।
PositoAI की भूमिका
PositoAI रिसर्च साइट है, ट्रेडिंग ऐप नहीं: यह हर कंपनी का पिछला क्लोज़िंग भाव और उसकी तारीख़ दिखाता है, लाइव भाव नहीं, और कोई ऑर्डर नहीं लगाता।
मुख्य शब्द
- बिड और आस्क (Bid and ask)
- अभी ख़रीदारों का सबसे ऊँचा भाव और बेचने वालों का सबसे कम भाव।
- स्प्रेड (Spread)
- बिड और आस्क का अंतर; लिक्विड शेयरों में कम, कम ट्रेड होने वालों में ज़्यादा।
- मार्केट ऑर्डर (Market order)
- उपलब्ध सबसे अच्छे भाव पर तुरंत ख़रीदें या बेचें।
- लिमिट ऑर्डर (Limit order)
- सिर्फ़ अपने चुने भाव या उससे बेहतर पर ख़रीदें या बेचें।
- लिक्विडिटी (Liquidity)
- भाव ज़्यादा खिसकाए बिना शेयर कितनी आसानी से ख़रीदा या बेचा जा सकता है।
- T+1 सेटलमेंट
- सौदे के एक कामकाजी दिन बाद शेयर और पैसे का लेन-देन (भारत और अमेरिका)।
ख़ुद करके देखें
एक काल्पनिक कंपनी, Orbit Tech, का सबसे अच्छा बिड ₹99.50 और सबसे अच्छा आस्क ₹100.00 है। आप 10 शेयर ख़रीदने का मार्केट ऑर्डर देते हैं। चार्ज से पहले शेयर लगभग कितने के पड़ेंगे?
मार्केट ख़रीद ऑर्डर सबसे अच्छा आस्क, ₹100.00, लेता है, इसलिए 10 शेयर चार्ज से पहले लगभग ₹1,000 के पड़ेंगे। ₹99.50 का बिड वह है जो ख़रीदार दे रहे हैं; बेचने पर आपको लगभग इतना मिलता।
PositoAI पर लाइव देखें
PositoAI पर Infosys खोलें और उसका भाव और उस भाव की तारीख़ देखें। फिर Low Price Stocks पेज खोलें और पढ़ें कि बहुत कम भाव वाले शेयर अक्सर कम ट्रेड क्यों होते हैं।
यह क्या नहीं बताता
ऑर्डर देना आने से यह पता नहीं चलता कि क्या और कब ख़रीदें। ऑर्डर के प्रकार भाव और रफ़्तार तय करते हैं, जोखिम नहीं: लिमिट ऑर्डर से ख़रीदा शेयर भी बाद में गिर सकता है।
छोटा क्विज़
बिड भाव क्या है?
बिड ख़रीदारों का सबसे अच्छा भाव है; आस्क बेचने वालों का सबसे अच्छा भाव।
आप सिर्फ़ ₹250 या कम भाव पर ख़रीदना चाहते हैं। कौन-सा ऑर्डर सही है?
लिमिट ऑर्डर सिर्फ़ आपके भाव या बेहतर पर पूरा होता है, इसलिए आप ₹250 से ज़्यादा नहीं देंगे।
T+1 सेटलमेंट का क्या मतलब है?
T+1 यानी सौदे का दिन + एक कामकाजी दिन; भारत और अमेरिका दोनों में शेयर सौदे ऐसे ही सेटल होते हैं।
आमतौर पर कौन-सा शेयर ज़्यादा लिक्विड होता है?
बड़ी, ख़ूब ट्रेड होने वाली कंपनियाँ लिक्विड होती हैं: पिछले भाव के क़रीब, कम स्प्रेड पर जल्दी सौदा हो जाता है।
इनमें से भारत में शेयर सौदों पर कौन-सा चार्ज लगता है?
भारत में शेयर सौदों पर STT लगता है, साथ में ब्रोकरेज, एक्सचेंज चार्ज, SEBI फ़ीस, GST और स्टांप ड्यूटी।
यह PosiStep पूरा करने के लिए इस पेज के सभी सवालों के सही जवाब दें।
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PosiCourse सिर्फ़ शिक्षा के लिए है। यह किसी शेयर को ख़रीदने या बेचने की सलाह नहीं देता। काल्पनिक आँकड़ों वाले उदाहरण असली कंपनियाँ नहीं हैं। PositoAI is for research and education only and is not investment advice.