टेक्निकल एनालिसिस (technical analysis) पिछले भाव और ट्रेडिंग वॉल्यूम के पैटर्न का अध्ययन करने का तरीक़ा है, ज़्यादातर चार्ट के ज़रिए, ताकि भाव की आगे की चाल का अंदाज़ा लगाया जा सके। टेक्निकल एनालिस्ट कंपनी के कारोबार की बजाय यह देखते हैं कि उसके शेयर का भाव कैसे चला है।
टेक्निकल एनालिसिस क्या है
टेक्निकल एनालिसिस तीन विचारों पर टिका है: भाव में उपलब्ध जानकारी झलकती है, भाव ट्रेंड में चलते हैं, और बाज़ार का व्यवहार, जो इंसानी मनोविज्ञान से चलता है, ख़ुद को दोहराता है। टेक्निकल एनालिस्ट ऐसे पैटर्न और संकेत खोजते हैं जो बताएँ कि कोई ट्रेंड जारी रहेगा या पलटेगा।
आम औज़ार
चार्ट: लाइन, बार और कैंडलस्टिक चार्ट समय के साथ भाव दिखाते हैं; कैंडलस्टिक हर अवधि का ओपन, हाई, लो और क्लोज़ दिखाती है। ट्रेंड: लगातार ऊँचे हाई और ऊँचे लो अपट्रेंड का संकेत हैं; नीचे होते हाई और लो डाउनट्रेंड का। सपोर्ट और रेज़िस्टेंस: भाव के वे स्तर जहाँ बार-बार ख़रीद या बिक्री आई है। मूविंग एवरेज: 50 या 200 दिन जैसी अवधि का औसत भाव, जो रोज़ के शोर को कम करता है। इंडिकेटर: जैसे रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI), जो मापता है कि भाव कितनी तेज़ी से चले हैं, और MACD, जो मूविंग एवरेज की तुलना करता है। वॉल्यूम: भाव की चाल के पीछे की ताक़त आँकने के लिए।
व्यवहार में यह कैसे काम करता है
एक टेक्निकल एनालिस्ट किसी शेयर को उसके 200 दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर, ऊँचे हाई बनाते हुए, और तेज़ी वाले दिनों में बढ़ते वॉल्यूम के साथ देखकर यह नतीजा निकाल सकता है कि अपट्रेंड क़ायम है। वह सपोर्ट स्तर के पास ख़रीदने और उसके ठीक नीचे स्टॉप-लॉस लगाने की योजना बना सकता है। टेक्निकल एनालिसिस ज़्यादातर ट्रेडर इस्तेमाल करते हैं, जिनकी समय-सीमा मिनटों से लेकर महीनों तक की होती है।
एक आसान उदाहरण
एक शेयर छह महीनों में तीन बार ₹400 से वापस उछला है; ट्रेडर ₹400 को सपोर्ट स्तर कहते हैं। जब वह फिर ₹405 तक गिरता है, तो कुछ ट्रेडर एक और उछाल की उम्मीद में ख़रीदते हैं, और सपोर्ट टूटने की स्थिति के लिए ₹390 पर स्टॉप-लॉस रखते हैं। अगर भाव भारी वॉल्यूम के साथ ₹400 से नीचे चला जाता है, तो वे इसे और कमज़ोरी का संकेत मानते हैं।
सीमाएँ
पैटर्न की अलग-अलग व्याख्या हो सकती है, और अलग एनालिस्ट एक ही चार्ट को अलग पढ़ सकते हैं। संकेत अक्सर नाकाम होते हैं, ख़ासकर अचानक आई ख़बरों के आसपास। पिछले पैटर्न ज़रूरी नहीं कि दोहराएँ। टेक्निकल एनालिसिस यह भी नहीं देखता कि कारोबार बुनियादी रूप से मज़बूत है या नहीं, इसलिए कोई शेयर चार्ट पर मज़बूत दिख सकता है जबकि कंपनी कमज़ोर हो रही हो, या इसका उल्टा।
टेक्निकल बनाम फ़ंडामेंटल एनालिसिस
फ़ंडामेंटल एनालिसिस पूछता है "यह कंपनी कितनी क़ीमती है?" और लंबी अवधि के निवेश के लिए ठीक है। टेक्निकल एनालिसिस पूछता है "भाव आगे कहाँ जा सकता है?" और ट्रेडिंग के लिए ठीक है। कुछ निवेशक दोनों को मिलाते हैं: कंपनियाँ चुनने के लिए फ़ंडामेंटल, और ख़रीदने-बेचने का समय तय करने के लिए टेक्निकल।
निवेशकों के लिए यह क्यों मायने रखता है
अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, तब भी बुनियादी टेक्निकल शब्दों की समझ से बाज़ार की टिप्पणियाँ पढ़ना आसान होता है, और सिर्फ़ थोड़े समय के चार्ट के जोश में ख़रीदने से बचने में मदद मिलती है।
समय-सीमा मायने रखती है
एक ही शेयर डेली चार्ट पर तेज़ी वाला और वीकली चार्ट पर मंदी वाला दिख सकता है। थोड़े समय के ट्रेडर मिनट या घंटे के चार्ट देखते हैं; स्विंग ट्रेडर डेली चार्ट; और टेक्निकल इस्तेमाल करने वाले लंबी अवधि के निवेशक अक्सर वीकली या मंथली चार्ट पसंद करते हैं, जो शोर छाँट देते हैं। हमेशा साफ़ रहें कि कोई संकेत किस समय-सीमा का है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
"चार्ट भविष्य बता देते हैं।" वे संभावनाएँ और पैटर्न दिखाते हैं, पक्की बात नहीं।
"ज़्यादा इंडिकेटर का मतलब बेहतर फ़ैसले।" बहुत सारे इंडिकेटर अक्सर उलटे संकेत देते हैं।
"टेक्निकल एनालिसिस हर शेयर पर काम करता है।" कम ट्रेड होने वाले शेयरों पर यह कम भरोसेमंद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कैंडलस्टिक चार्ट क्या है?
एक चार्ट जो हर अवधि का ओपन, हाई, लो और क्लोज़ दिखाता है।
मूविंग एवरेज क्या है?
तय दिनों का औसत भाव, जो रोज़ अपडेट होता है।
सपोर्ट क्या है?
भाव का वह स्तर जहाँ ख़रीद ने बार-बार गिरावट रोकी है।
क्या टेक्निकल एनालिसिस जुआ है?
यह एक व्यवस्थित तरीक़ा है, पर बार-बार ट्रेडिंग में इस्तेमाल करने पर इसमें जोखिम ज़्यादा है।
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सारांश
टेक्निकल एनालिसिस भाव की चाल का अंदाज़ा लगाने के लिए चार्ट, ट्रेंड, सपोर्ट-रेज़िस्टेंस, मूविंग एवरेज और इंडिकेटर के ज़रिए भाव और वॉल्यूम के पैटर्न का अध्ययन करता है। इसे ज़्यादातर ट्रेडर इस्तेमाल करते हैं। यह व्यक्तिपरक है, ग़लत हो सकता है और कारोबार की बुनियाद को नहीं देखता, इसलिए कई निवेशक इसे फ़ंडामेंटल एनालिसिस के साथ मिलाते हैं, या लंबी अवधि के फ़ैसलों के लिए मुख्य रूप से फ़ंडामेंटल पर भरोसा करते हैं।